मैं कैसी कवयित्री हूँ ..
नहीं जानती थी कि आज हिन्दी दिवस है
नहीं जानती थी कि आज हिन्दी हिन्दी खेलना है
क्या हिन्दी को एक दिन में मनाया जा सकेगा
मैं कैसे मनाऊं ये दिवस
आज हिन्दी साहित्य के नाम का केक काट लूं या
हिन्दी कविताओं का गुलदस्ता बना मेज़ पे सजा लूं
और कहाँ मनाऊं ये दिवस
परदेस में कौन सुनेगा मेरा हिन्दी प्रेम
और दिल्ली अभी भी दूर है दोस्तों
पर मैं क्यूँ मनाऊं ये दिवस
क्यूँ दूँ श्रद्धांजलि उस भाषा को
जो अमर है मुझमें
कितने ही अनुभव लिए
अब अपनी मातृभाषा से प्रेम करना कैसे सीखूं
बचपन की हर याद में हिन्दी है
चाचा चौधरी का मज़ा आर्चिज़ कॉमिक्स में कहाँ मिल पाया
हिंदी न हो तो शिवानी जिज्जी को कैसे याद करूँ
कैसे प्रेमचंद की 'निर्मला' को अंग्रेजी में अनुवाद करूँ
पापा की हर डांट हिन्दी में थी
वैसे दादी पंजाबी है पर वो भी गुस्से में हिन्दी ही बोलती थी
लेकिन माँ ने पुचकार लिया ...
"बिटिया" कह के मना लिया
हिंदी के कितने ही निबंध लिखवाए मुझसे मेरी छोटी बहना ने
हिंदी की थी भाई की वो पहली गाली जिसपे उसे मार पड़ी
पापा परदेस जाने लगे तो उनके बैग में छुपाया एक पत्र
गुडिया चाहे न लाना ... पापा जल्दी आ जाना
हाँ .. हिंदी में
हिंदी प्रेम इसलिए नहीं क्योंकि पढ़नी चाहिए
हिंदी प्रेम इसलिए क्यूँकि .. ये अपनी है
यूँ तो अंग्रेजी में बहुत गिटपिट आती है मुझे
पर अपनी भावनाओं को हिन्दी में ही व्यक्त कर पाती हूँ मैं
क्यूँकि इसी में बह पाती हूँ मैं
और सुन लो सब.. डर नहीं है मुझे
हिन्दी के जैसे ही मुझमें भी मिलावट है
थोड़ी उर्दू, बंगला, पंजाबी भी है
क्यूँ करूँ मैं भाषा का सम्बन्ध विच्छेद
हिन्दी में कितनी भाषाओं का समावेश है
राष्ट्रीय भाषा है .. धर्मंनिरपेक्ष भाषा है
हिन्दी गवर्नमेंट स्कूल की भाषा नहीं
मेरी भाषा है .. हम सबकी भाषा है
माँ कहती है मेरा पहला शब्द हिन्दी में था
माँ ...
मेरा अंतिम शब्द मैं कहती हूँ
... साईं