January 8, 2017

सीमित - असीमित

8 comments:

yashoda Agrawal said...

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 09 जनवरी 2017 को लिंक की गई है.... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

सुशील कुमार जोशी said...

सुन्दर रचना ।

Malti Mishra said...

वाह्ह्ह्ह् बहुत सुंदर

savan kumar said...

सुन्दर शब्द रचना
http://savanxxx.blogspot.in

Sudha Devrani said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति

Ravindra Singh Yadav said...

सामाजिक वर्जनाओं में जकड़ी ज़िन्दगी को स्वच्छन्द आकाश में विचरने की तीव्र उत्कंठा होती है। स्त्री- संघर्ष को बयां करता मार्मिक शब्दचित्र।

sunita agarwal said...

sundar rachna :)

Gopesh Jaswal said...

सुन्दर रचना किन्तु किंचित जटिल. भाषा, बिम्ब, उपमा, रूपक आदि सरल हो तब भी कविता अच्छी हो सकती है. मिर्ज़ा ग़ालिब के दुरूह अंदाज़ स्थान पर आज फ़िराक गोरखपुरी का सरल अंदाज़ पाठकों को अधिक भाएगा.